The Best Gulzar Poetry in Hindi | Gulzar Poems | Gulzar Poetry on Love

क्या आप गुलज़ार शाहब के फैन है और उनकी कविता खोज रहे है पढ़ने के लिए ? आप बिलकुल सही पेज पर आये है।  यहां आपको गुलज़ार साहब की कविताओं की बेस्ट कलेक्शन The Best Collection of Gulzar Poetry in Hindi मिलेंगे।  जिसको आप पढ़ कर एन्जॉय कर सकते है या अपने फ्रेंड्स, गर्लफ्रेंड के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते है। 


गुलज़ार साहेब के बारे में तो आपको पता होगा ही की वो एक महान कवी है। और अगर आपके Favorite है तो उनके कवताओं के लेटेस्ट कलेक्शन latest Collection of Gulzar Poems आपको यहाँ मिलेंगे। 


तो आईये बिना देर किये गुलज़ार शाहब की कविताओं को हिंदी में Gulzar Poetry in Hindi पढ़ते है। 
अगर आपको पसंद आये तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना मत भूलना। 


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मौत से पहले भी एक मौत होती है ,
जरा देखो कभी तुम किसी से जुदा होकर।
मोहब्बत के बाद मोहब्बत मुमकिन तो है ,
पर वो टूट के चाहना बस एक बार होता है।
जब तक न लगे बेवफाई की ठोकर,
हर किसी को अपने पसंद पर नाज होता है।
मुद्दतों बाद आज फिर परेशान हुआ दिल,
ना जाने किस हाल में होगा वो मुझसे रूठने वाला।
साथ छोड़ने वालो को तो बस एक बहाना चाहिए ,
वरना साथ निभाने वाले तो आखिरी साँस तक साथ निभाते है।
मुझसे मोहब्बत पर मशवरा मांगते है लोग,
तेरा इश्क़ इस तरह तजुर्बा दे गया मुझे।



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जब मिलो किसी से तो रिश्ता जरा दूर का रखना,
बहुत तड़पाते है अक्सर ये गले से लगाने वाले।
वो आराम से है जो पत्थर के है ,
मुसबित तो साहब एहसास वालों की है।
टूट कर चाहना और फिर टूट जाना
बात छोटी सी है मगर जान निकल जाती है।
तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो,
अब आँख तो भर आती है मगर तुम नज़र नहीं आते।
कहा था ना साहब इश्क़ में बर्बाद हो जाओगे,
मैं से हम, हम से तुम, और तुम से कौन हो जाओगे।
तेरा ही जिक्र है मेरे अल्फ़ाज़ में मेरे दोस्त,
बस लिखने का तरीका कुछ ऐसा है की तुम सरे आम ना हो।  

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भीड़ सी हो गयी थी उनके दिल में,
फिर कुछ यूँ हुआ की हम उनके दिल से निकल आये।
एक एहसास ही काफी है तेरे करीब होने का,
यूँ नजदीकियां बढ़ा कर ख्वाहिशों को हवा ना दे।   
गुजर जाते है ख़ूबसूरत लम्हे यूँ ही मुसाफिरों की तरह,
और यादें वही खड़ी रह जाती है रुके हुए रस्ते की तरह।
न जाने कितने दर्द आबाद हो उसके दिल में,
जो अकेला बैठा हो उसे तन्हा नहीं कहते।
वक़्त बित जाने के बाद अक्सर ये एहसास होता है,
जो छूट गया वो लम्हा बेहतर था।
कितने ख़ूबसूरत हुआ करते थे वो बचपन के दिन,
दो उंगलियां जुड़ते ही दोस्ती हो जाती थी।
वो करीब बहुत है मगर दूरियों के साथ,
हम दोनों जी तो रहे है मगर मजबूरियों के साथ। 


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वो मन बना चुके थे हमसे दूर जाने का,
और हमे लगा की हमे मानना नहीं आता। 
न जाने किसने पढ़ी है मेरे हक़ में दुआ,
आज तबियत में थोड़ा आराम सा है। 
तुझे लिखते वक़्त महसूस होता है अक्सर,
मुझे खुद से बिछड़े एक जमाना हो गया। 
खामोशियाँ बहुत कुछ कहती है
कान लगा कर नहीं दिल लगा कर सुनो। 
बहुत देर कर दी तुमने मेरे दिल की धड़कन महसूस करने में,
वो दिल नीलम हो गया जिस पर कभी हुकूमत तुम्हारी थी। 
अगर मोहब्बत किसी से बेहिसाब हो जाए,
तो समझ जाना की वो किस्मत में नहीं है। 
बना कर उसने मेरे संग रेत के महल,
न जाने क्यों उसने बारिशों को खबर कर दी।        


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पूछती है खैरियत मेरी हर रोज वो ख्वाब में आकर,
महबूब की फिक्र भी मेरी कमाल की है। 
बहुत मीठा नशा था उसकी यादों का 
वक़्त गुजरता चला गया, हम आदी होते गए। 
खामोशियाँ बोल देती है जिनकी बातें नहीं होती,
इश्क़ वो भी करते है जिनकी मुलाकातें नहीं होती। 
वक़्त निकल जाने के बाद जो क़द्र करे,
उसे क़द्र नहीं अफ़सोस कहते है। 
मुझे किश्मत से कोई शिकवा नहीं,
मगर वो किश्मत में आया ही क्यों जो मुकद्दर में नहीं था। 
आज फिर से दिल को कोई बेहिसाब याद आ रहा है,
आज फिर उससे नफरत की कोई वजह ढूंढनी होगी।   
साजिशों के थोड़ा हम भी शिकार हो गए,
जितना दिल साफ़ रखा था उतने ही गुनहगार हो गए।  


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शिकायतों की पाई पाई जोड़ कर रखी थी मैंने,
लेकिन उसने गले लगा कर सारा हिसाब बिगाड़ दिया।  
अजीब सी बेताबी है तेरे बिन,
रह भी लेते है और रहा भी नहीं जाता। 
यूँ तो बहुत से रस्ते है मुझ तक पहुंचने के,
मगर राह-ए-मोह्हबत से आओगे तो फासला कम पड़ेगा। 
जब खुद से दोस्ती हुई तो पता चला मुझे,
मुझसे बेहतर मुझे और कोई नहीं जनता। 
बहुत गुमान था हवा को आज़ादी पर अपने,
लेकिन किसी ने उसे गुब्बारे में भरा और बेच दिया।     
हमने तो कांटो को भी नरमी से छुआ है अक्सर,
लोग बेदर्द है फूलों को भी मसल देते है।  


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Conclusion

मैं आशा करता हूँ की गुलज़ार शाहब की ये हिंदी कविताएँ आपके दिल को छू कर रोम रोम को शिहरने पर
मजबूर कर दी होंगी। उनकी कविताओं की तो यही खास बात है की हर एक शब्द दिल को छू कर निकलती है
और एक अंदर से आवाज़ आती है की क्या बोला है आपने बिलकुल सही। फिर हम ये भी सोचने पर मज़बूर हो
जाते है की गुलज़ार साहब इतनी गहरी बातें सोच कैसे लेते है।  और यही सब खास बातें उन्हें सबसे अलग और
स्पेशल बनती है। 


तो फ्रेंड्स, अगर आपको ये गुलज़ार शाहब की कवितायेँ पसंद आयी तो शेयर जरूर करियेगा। 


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